18k 22k और 24 कैरेट सोने की भाव में आई बड़ी गिरावट | Gold Price Today

By Shreya

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Gold Price Today – भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था में स्वर्ण का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। यह केवल आभूषण का माध्यम नहीं, बल्कि संपत्ति संरक्षण और वित्तीय सुरक्षा का सशक्त साधन माना जाता है। 11 फरवरी 2026 के दिन भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में विशेष हलचल देखी गई, जिसने क्रेताओं और निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। इस दिन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विभिन्न आर्थिक कारकों ने मूल्य निर्धारण को प्रभावित किया।

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वर्तमान मूल्य परिदृश्य

स्वर्ण की कीमतें उसकी शुद्धता के आधार पर निर्धारित होती हैं, जिसे कैरेट में मापा जाता है। सबसे उच्च गुणवत्ता वाला स्वर्ण 24 कैरेट का होता है, जिसमें शुद्धता लगभग 99.9 प्रतिशत होती है। आज के बाजार में 24K स्वर्ण का मूल्य प्रति 10 ग्राम ₹1,56,000 से लेकर ₹1,60,000 के बीच उतार-चढ़ाव कर रहा था। यह मूल्य निवेशकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रकार का स्वर्ण दीर्घकालिक संपत्ति संचय के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

आभूषण निर्माण में सर्वाधिक उपयोग होने वाला 22 कैरेट स्वर्ण, जिसकी शुद्धता 91.6 प्रतिशत होती है, 24K की तुलना में कुछ सस्ता रहा। इस प्रकार के स्वर्ण में अन्य धातुओं का मिश्रण होता है जो इसे मजबूती प्रदान करता है और आभूषण बनाने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, 18 कैरेट और 14 कैरेट स्वर्ण भी बाजार में उपलब्ध है, जिनकी कीमतें अपेक्षाकृत कम होती हैं और ये विशेष डिजाइन के आभूषणों में प्रयुक्त होते हैं।

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भौगोलिक मूल्य विविधता

भारत के विभिन्न महानगरों और शहरों में स्वर्ण की कीमतों में स्पष्ट अंतर परिलक्षित होता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और वित्तीय केंद्र मुंबई में स्थानीय करों, परिवहन व्यय और बाजार प्रीमियम के कारण मूल्य तुलनात्मक रूप से अधिक रहते हैं। इन महानगरों में व्यापारिक गतिविधियों की अधिकता और उच्च मांग भी मूल्य वृद्धि में योगदान देती है। दूसरी ओर, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में मूल्य में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम देखा जाता है।

स्थानीय मूल्य निर्धारण में वस्तु एवं सेवा कर (GST) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में स्वर्ण पर 3 प्रतिशत GST लागू है, जो अंतिम क्रय मूल्य में जुड़ता है। इसके अलावा, विभिन्न ज्वेलर्स द्वारा लगाए जाने वाले मेकिंग चार्जेज, डिजाइन शुल्क और हॉलमार्किंग व्यय भी कुल कीमत को प्रभावित करते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को खरीदारी से पूर्व सभी अतिरिक्त शुल्कों की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

मूल्य परिवर्तन के निर्धारक तत्व

अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय स्वर्ण बाजार पर पड़ता है। विश्व स्तर पर स्वर्ण की मांग और आपूर्ति में असंतुलन होने पर मूल्य प्रभावित होते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वर्ण का व्यापार डॉलर में होता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो स्वर्ण सापेक्षिक रूप से महंगा हो जाता है।

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भारतीय रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। रुपये के कमजोर होने पर आयातित स्वर्ण महंगा हो जाता है, जिससे देश में इसकी खुदरा कीमतें बढ़ जाती हैं। भारत विश्व में स्वर्ण के सबसे बड़े आयातकों में से एक है, इसलिए विनिमय दर का प्रभाव अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां, ब्याज दरों में परिवर्तन और मुद्रास्फीति की दर भी स्वर्ण मूल्यों को प्रभावित करने वाले कारक हैं।

शेयर बाजार में अस्थिरता के समय निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में स्वर्ण की ओर रुख करते हैं। यह परंपरागत रूप से ‘सेफ हैवन’ माना जाता है, जो आर्थिक अनिश्चितता के दौरान मूल्य संरक्षण प्रदान करता है। राजनीतिक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक महामारी जैसी स्थितियां भी स्वर्ण की मांग को बढ़ाती हैं।

क्रय निर्णय के लिए मार्गदर्शन

आज की बाजार स्थिति में जहां कीमतों में गिरावट देखी गई है, वहीं यह अल्पकालिक निवेशकों के लिए अनुकूल अवसर प्रस्तुत करता है। जो निवेशक बाजार की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, उनके लिए मूल्य गिरावट का लाभ उठाना समझदारी हो सकती है। हालांकि, दीर्घकालिक निवेशकों को बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से स्वर्ण ने लंबी अवधि में स्थिर रिटर्न दिया है।

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आभूषण खरीदारों को केवल स्वर्ण के मूल भाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि मेकिंग चार्जेज, वेस्टेज और GST को भी ध्यान में रखना चाहिए। कई बार ये अतिरिक्त शुल्क काफी अधिक होते हैं और अंतिम कीमत को काफी बढ़ा देते हैं। विभिन्न ज्वेलर्स से तुलना करना और हॉलमार्क प्रमाणीकरण की जांच करना अनिवार्य है।

निवेश रणनीति और सावधानियां

स्वर्ण में निवेश करते समय विविधीकरण का सिद्धांत अपनाना चाहिए। अपनी संपूर्ण बचत को केवल स्वर्ण में नहीं लगाना चाहिए, बल्कि इसे अपने समग्र निवेश पोर्टफोलियो का एक हिस्सा बनाना चाहिए। विशेषज्ञ सामान्यतः कुल निवेश का 10-15 प्रतिशत स्वर्ण में रखने की सलाह देते हैं। यह अनुपात व्यक्ति की आयु, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार भिन्न हो सकता है।

भौतिक स्वर्ण के अलावा, गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। ये विकल्प भंडारण की चिंता से मुक्त रखते हैं और तरलता भी प्रदान करते हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में तो सरकार की ओर से ब्याज भी मिलता है, जो इसे आकर्षक बनाता है। हालांकि, प्रत्येक निवेश विकल्प की अपनी विशेषताएं और सीमाएं हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।

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बाजार की भविष्य संभावनाएं

आने वाले समय में स्वर्ण की कीमतों की दिशा विभिन्न वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में परिवर्तन, मुद्रास्फीति की दर, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार का प्रदर्शन – ये सभी स्वर्ण मूल्यों को प्रभावित करेंगे। भारत में त्योहारी सीजन और विवाह सीजन के दौरान मांग में वृद्धि होती है, जो कीमतों को ऊपर की ओर धकेल सकती है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितता बनी रहने की स्थिति में स्वर्ण की मांग मजबूत रह सकती है। हालांकि, यदि शेयर बाजार में तेजी आती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो स्वर्ण में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है। इसलिए निवेशकों को बाजार की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखनी चाहिए।

11 फरवरी 2026 को स्वर्ण बाजार में देखे गए उतार-चढ़ाव ने निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। मूल्यों में आई गिरावट ने अल्पकालिक खरीदारी का अवसर प्रदान किया है, जबकि दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखने वाले निवेशकों के लिए स्वर्ण हमेशा की तरह एक सुरक्षित विकल्प बना हुआ है। बाजार की गतिशीलता को समझते हुए सोच-समझकर निवेश निर्णय लेना ही बुद्धिमानी है।

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स्वर्ण खरीदते समय केवल प्रति ग्राम मूल्य ही नहीं, बल्कि सभी अतिरिक्त शुल्कों, प्रमाणीकरण और विश्वसनीय विक्रेता का चयन भी महत्वपूर्ण है। सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए बाजार की नियमित निगरानी और वित्तीय विशेषज्ञों से परामर्श लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

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