School Holiday Update 2026 – इस साल सर्दी का मौसम अपने पूरे तेवर के साथ आया है और उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में ठंड ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पारा लगातार गिरता जा रहा है और शीतलहर की चपेट में पूरा उत्तर भारत आ चुका है। ऐसे कठिन मौसम में सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों की होती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में कमजोर होती है।
सुबह के वक्त घना कोहरा इतना गहरा होता है कि कुछ मीटर की दूरी तक भी कुछ दिखाई नहीं देता। इस कोहरे और कड़ाके की ठंड में नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्कूल भेजना किसी भी माता-पिता के लिए चिंताजनक बात बन गई थी। अभिभावकों की इसी चिंता को समझते हुए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और राहत भरा निर्णय लिया है। कई राज्यों में स्कूलों और कॉलेजों की सर्दी की छुट्टियां आगे बढ़ा दी गई हैं।
प्रशासन ने समय रहते उठाया कदम
राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने मौसम की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए। यह फैसला बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो कि हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन का यह कदम अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन दोनों को राहत देने वाला साबित हुआ है।
मौसम विभाग ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ठंड का असर बना रहेगा और कुछ इलाकों में बारिश की भी संभावना है। बारिश के बाद ठंड और तेज हो जाती है, जिससे सड़कों पर फिसलन और कोहरे का खतरा बढ़ जाता है। इन सब परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए छुट्टियां बढ़ाने का निर्णय एकदम सही और समय पर लिया गया है।
छोटे बच्चों की सेहत पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चे शारीरिक रूप से अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते और उनका शरीर तापमान में अचानक होने वाले बदलाव को आसानी से नहीं झेल पाता। ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण का प्रकोप तेजी से फैलता है। स्कूलों में एक साथ बहुत सारे बच्चे होते हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका और भी अधिक हो जाती है।
बाल रोग विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि इस उम्र के बच्चों को अत्यधिक ठंड में बाहर निकालना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ठंड में बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और वे जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं। इसलिए इस मौसम में जितना हो सके बच्चों को घर की गर्माहट में ही रखना सबसे बेहतर उपाय है।
ऑनलाइन पढ़ाई से पाट रहे हैं शैक्षणिक खाई
छुट्टियां बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई को नुकसान न हो, इसके लिए कई निजी और सरकारी स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा का सहारा लिया है। शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप, गूगल मीट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बच्चों को घर बैठे पढ़ा रहे हैं। इससे न केवल पाठ्यक्रम की गति बनी रह रही है, बल्कि बच्चे मानसिक रूप से भी सक्रिय और व्यस्त रह रहे हैं।
हालांकि छोटे बच्चों के लिए लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना भी उचित नहीं होता, इसलिए शिक्षक ऑनलाइन सत्र को सीमित और रोचक बना रहे हैं। छोटे-छोटे वीडियो लेक्चर, वर्कशीट और रिवीजन प्रश्नों के जरिए बच्चों को घर पर पढ़ाई से जोड़ा जा रहा है। यह तरीका आधुनिक शिक्षा की एक सकारात्मक झलक भी है, जो आपातकालीन स्थितियों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
कॉलेज और उच्च कक्षाओं की अलग व्यवस्था
जहां एक ओर छोटे बच्चों के लिए पूरी तरह से छुट्टी घोषित की गई है, वहीं कॉलेजों और उच्च कक्षाओं के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। कई संस्थानों में कक्षाओं का समय बदलकर सुबह की जगह दोपहर में कर दिया गया है, ताकि छात्र ठंडे तापमान और घने कोहरे से बच सकें। इससे छात्रों को पढ़ाई भी जारी रखने का मौका मिल रहा है और स्वास्थ्य जोखिम भी कम हो रहा है।
जिन कॉलेजों में सेमेस्टर परीक्षा या प्रैक्टिकल आसपास हैं, वहां सीमित उपस्थिति के साथ कक्षाएं चलाई जा रही हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने-अपने संस्थान की आधिकारिक सूचना पर ध्यान रखें और किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर कई बार भ्रामक जानकारियां फैल जाती हैं, जिनसे बचना जरूरी है।
अभिभावकों की जिम्मेदारी और सावधानियां
छुट्टियों के इन दिनों में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि बच्चे पूरे दिन घर पर रहते हैं। बच्चों को गर्म ऊनी कपड़े पहनाएं और सुबह-शाम के समय उन्हें बाहर जाने से रोकें। खानपान में गर्म और पौष्टिक चीजें शामिल करें जैसे सूप, दाल, हलवा, और गर्म दूध जो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।
इस दौरान घर के अंदर हल्की शारीरिक गतिविधियां करवाएं ताकि बच्चे सक्रिय रहें और सर्दी से उनका शरीर लड़ने के लिए तैयार रहे। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को किताबें पढ़ने, चित्र बनाने और क्रिएटिव एक्टिविटी में लगाएं। इससे उनका मानसिक विकास भी होगा और वे स्क्रीन की लत से भी बचे रहेंगे।
सही जानकारी लें, अफवाहों से बचें
आजकल सोशल मीडिया पर छुट्टियों को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलती रहती हैं, जो अभिभावकों और छात्रों को भ्रमित करती हैं। केवल जिला शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन और राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट या सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी अनजान स्रोत से मिली जानकारी को सच मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
अगर आपके बच्चे के स्कूल से कोई सूचना नहीं आई है तो सीधे स्कूल के प्रधानाचार्य या शिक्षक से संपर्क करें। जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सही और प्रामाणिक जानकारी रखने से न केवल आपको बल्कि पूरे समाज को लाभ होता है।
ठंड में बच्चों की देखभाल ही असली प्राथमिकता
अंत में यही कहा जा सकता है कि इस कड़ाके की सर्दी में बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक लक्ष्य से बढ़कर है। शिक्षा विभाग का यह फैसला एक जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासन की निशानी है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग यानी बच्चों की परवाह करता है। कुछ दिनों की छुट्टी से पढ़ाई का जो नुकसान होगा, वह बाद में पूरा किया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।









